सोमवार, 12 जनवरी 2009

कुशाग्र की कविता

कुशाग्र ११ साल का एक बच्चा है. वह छठी कक्षा में पढ़ता है. उसकी दादी का देहावसान ८८-८९ साल की पूरी आयु में हुआ. उसकी दादी की मृत्यु के तीसरे दिन,जब घर में सम्वेदना जताने वाले लोगों और मेहमानों का तांता लगा था और पढाई का कतई माहौल नहीं था, मैंने उसे एक कापी में कुछ लिखते हुए पाया. जिज्ञासावश मैंने उसके पास जा कर देखा कि आख़िर वह ऐसी विषम स्थिति में कौन सा विषय पढ़ रहा है. वास्तव में वह अपने मन के उद्गार कविता द्वारा प्रकट कर रहा था. मुझे उसकी सम्वेदना, काव्य प्रतिभा और शब्द रचना ने प्रभावित किया. प्रस्तुत है ११ वर्षीय कुशाग्र की रचना :

तोहफे सी मिली थी,
कमल जैसी खिली थी
वह मेरे अपने लिए,
हर चीज़ से बड़ी थी


पाला उसने मुझको ,
जैसे उसका दुलारा
लोरी सुना सुलाती,
कहती तू है प्यारा


मैं उससे बतियाता
वह मुझसे खुश होती
मैं यदि दुःख बतलाता
तो वह ख़ुद से रोती.

भले तुझे हो कष्ट
मुझको सदा बचाया
हर पल तूने बढ़कर
कर्तव्य को निभाया.



मुझे नहीं ये ज्ञान था
होगा अब कुछ ऐसा
हे भगवन यह तूने
कर डाला है कैसा

पंख लगाए तूने
चिड़िया सम उड़ चली
करूंगा पूरे सपने
जो तू देखकर उड़ पड़ी .

25 टिप्‍पणियां:

  1. कितने जबरदस्त भाव प्रकट कर दिये हैं उस नन्हे मुन्ने ने !! इश्वर उसे यह चोट सहने की शक्ति प्रदान करे और इसे अपनी दादी द्वारा देखे सपने साकार करने की तौफ़ीक बख्शे।

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  2. हमें भी ११ वर्षीय कुशाग्र की सम्वेदना, काव्य प्रतिभा और शब्द रचना ने काफी प्रभावित किया.....वास्‍तव में उसे गहरा धक्‍का पहुंचा है....भगवान से प्रार्थना है कि वे उसे इस क्षति को सहने की शक्ति दें।

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  3. bachche ki vyatha se parichit karane ke liye sadhuvad. mere blog par aane ke liye dhanyawad. swapn

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  4. आपने अल्पायु नवांकुर कवि हृदयी बालक कुशाग्र की
    पद्यात्मक अभिव्यक्ति से हमें भाव विभोर कर दिया हेम जी...

    मैंने भी कभी लिख था >>>>

    " युग बदले, युग नेता बदले, बदला सकल जहान.
    पर न बदला इस दुनिया में, माँ का हृदय महान..."

    -विजय

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  5. Dear Hemji,
    Very nicely you have expressed
    the state of mind of a child in his grief.You have proved it again that"JAHAN NA PAHUCHE RAVI VAHAN PAHUNCHE KAVI".Congretulation! on this beatiful sympathetic poem.

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  6. बड़ा ही मर्मस्पर्शी लिखा है किशोर कुशाग्र ने।

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  7. kushaagra ke in masoom ehsaason ko mera pyaar,kalam aur bhawnaaon ka dridh naata hai.......

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  8. कुशाग्र अपने नाम को अवश्य सार्थक करेगा.......किसी भी प्रौढ़ रचनाकार से कमतर नही उसकी रचना.....जैसे गहरे भाव हैं वैसी ही सुंदर अभिव्यक्ति है.
    मेरी शुभकामनाये और आशीर्वाद उसके साथ हैं.उसे सदैव लिखने के लिए प्रोत्साहित कीजियेगा.Balak ne man moh liya.

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  9. kitna achchhi kavita likhi hai. kushagra ki prativa ko ubharne me uski sahayata kijiye

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  10. kushagra ki kavita man ko chho gayi aur esase bhi badi bat kitane sundar dhang se usane apne bhavon ko vyak kiya hai....aur shayad kavita banti hi aise hai , jav bhav man me bhar jate to ve bah jate hai papar par.....

    kushagra ko meri shubh kamnaaye....


    Regards

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  11. आपकी कविताओं में एक सहज भोलापन और अपनत्‍व है ।
    सादर सहित
    ........... अतुल

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  12. मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ
    मेरे तकनीकि ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं

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  13. अद्‍भुत...कुशाग्र की कलम चकित करती है

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  14. aaj ke samay me ek bache kaa apne dadi ke liye aisi abhivykti dekh kar ankhen num ho gayee ati sunder

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  15. Bahut savedanpurn rachna hain man vayatith ho gaya bacche ke man ka dukh ham samj sakte han bhagvan unko is dukh ko sahne ki shakti de...

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  16. बहुत ख़ूब

    ---
    आप भारत का गौरव तिरंगा गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने ब्लॉग पर लगाना अवश्य पसंद करेगे, जाने कैसे?
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  17. कुशाग्र की कविता सोचने पर मजबूर कर देती है. इतना छोटा बच्चा और इतने बड़े ख्यालात.

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  18. मैं उससे बतियाता
    वह मुझसे खुश होती
    मैं यदि दुःख बतलाता
    तो वह ख़ुद से रोती.

    Bahut achha likha hai kushagra ne

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  19. यथा नाम, तथा गुण, कुशाग्र को बहुत आशीष! ईश्वर उसकी दादी की आत्मा को शान्ति प्रदान करें!

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  20. baap re baap ...........sirf gyaarah varsh aur ye baat...........is chutke hamara aashirvaad........!!

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