रविवार, 15 मार्च 2009

'भिटौली'- घुघूती की टेर

कूर्मांचल में चैत्र का महीना विवाहिता और कुंवारी कन्याओं के लिए विशेष महत्त्व का है. चैत्र माह की संक्रांति को 'फूल देई' का त्यौहार मनाया जाता है. (कूर्मांचल में सौर माह प्रचलित है , जो हर माह की संक्रांति से प्रारंभ होता है.)इस दिन कन्याएं फूल,चावल और गुड़ ले कर मोहल्ले या गाँव के प्रत्येक घर जा कर उनकी देहरी( प्रवेश द्वार) पूजती हैं. और बदले में पैसे और उपहार प्राप्त करती हैं.कन्याओं द्वारा देहरी पूजा जाना शुभ माना जाता है. अनेक लोग अपनी विवाहिता बेटियों से सदैव मायके से विदा होते समय देहरी पुजवाते हैं.

मैं यहाँ चैत्र में विवाहिताओं को दी जाने वाली 'भिटौली' का वर्णन करना चाहता हूँ.'भिटौली' एक ऐसा पर्व है जिसका कूर्मांचल की हर विवाहिता को बेसब्री से इन्तजार रहता है. यह माह अपने मायके वालों से मिलने का माह है. परम्परानुसार भाई अपनी बहन के लिए वस्त्र,पकवान और अन्य उपहार ,जिसे भिटौली कहते हैं, लेकर उसके गाँव जाता है. पुराने समय में जब आवागमन के साधनों का अभाव था(पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी आवागमन उतना सुविधाजनक नहीं है ) चैत्र माह विवाहिता के लिए भाई से मिलने की गारेंटी होता था. आज के समय में मिलने जुलने के अन्य मौके उपलब्ध हो गए हैं और भाई बहन केवल पहाड़ी क्षेत्रों में ही नहीं देश-विदेश में निवास कर रहे हैं इस लिए सांकेतिक रूप से भाई बहनों को धन भेज दिया करते हैं.इस माह में घुघूती नाम की एक चिड़िया कूर्मांचल में देखी जाती है, जिसके चहकने से जो ध्वनि उत्पन्न होती है उससे ऐसा लगता है मानो कह रही हो-
भै भुखो मैं सिती, भै भुखो मैं सिती
(भाई भूखा रहा, मैं सोती रही।)
इस सम्बन्ध में एक दंत कथा (लोक कथा) प्रचलित है :एक गाँव में नरिया और देबुली नाम के भाई - बहन रहते थे | उनमें बहुत प्यार था | १५ वर्ष की उम्र में देबुली की शादी हुई ( जो उस समय के अनुसार बहुत बड़ी उम्र थी ) |शादी के बाद भी दोनों को ही एक दूसरे का विछोह सालता रहा | दोनों ही भिटौली के त्यौहार की प्रतीक्षा करने लगे | अंततः समय आने पर नरिया भिटौली की टोकरी सर पर रख कर खुशी - खुशी बहन से मिलने चला | बहन देबुली बहुत दूर ब्याही गयी थी | पैदल चलते - चलते नरिया शुक्रवार की रात को दीदी के गाँव पहुँच पाया | देबुली तब गहरी नींद में सोई थी | थका हुआ नरिया भी देबुली के पैर के पास सो गया | सुबह होने के पहले ही नरिया की नींद टूट गयी | देबुली तब भी सोई थी और नींद में कोई सपना देख कर मुस्कुरा रही थी | अचानक नरिया को ध्यान आया कि सुबह शनिवार हो जायेगा | शनिवार को देबुली के घर जाने के लिये उसकी ईजा ने मना कर रखा था | नरिया ने भिटौली की टोकरी दीदी के पैर के पास रख दी और उसे प्रणाम कर के वापस अपने गाँव चला गया |देबुली सपने में अपने भाई को भिटौली ले कर अपने घर आया हुआ देख रही थी | नींद खुलते ही पैर के पास भिटौली की टोकरी देख कर उसकी बांछें खिल गयीं |वह भाई से मिलने दौड़ती हुई बाहर गयी | लेकिन भाई नहीं मिला | वह पूरी बात समझ गयी |भाई से न मिल पाने के हादसे ने उसके प्राण ले लिये | कहते हैं देबुली मर कर 'घुघुती' बन गयी और चैत के महीने में आज भी गाती है :

भै भुखो मैं सिती, भै भुखो मैं सिती

41 टिप्‍पणियां:

  1. लोक कथाएँ , लोक मान्यताएँ और परंपराएँ हमें रिश्तों की नाज़ुक रेशमी डोर को सम्हालने - सहेजने का सलीका सिखाती हैं । आधुनिक युग में ये सभी चीज़ें पुरातन मान कर छोड़ दी गई हैं ,जिनका नतीजा समाज और पारिवारिक संबंधों में बिखराव के रुप में सामने आ रहा है । भाई - बहनों के बीच रिश्तों की मधुरता के लिए ही राखी -दूज जैसे त्योहार बनाये गये , जो दूर रहकर भी भावनात्मक रुप से जुड़ाव के प्रतीक हैं ।

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  2. पता नहीं, गंगा के मैदान में यह चिड़िया होती है या नहीं? पर बहन भाई और वातावरण तो वैसा ही होता है।
    अच्छी लगी पोस्ट।

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  3. बहुत ही सुंद्रर कहानी कही आप ने, लेकिन आज कल कहां रहा यह सब प्यार,
    धन्यवाद

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  4. 'घुघुती' shbd ka arth nahin maluum tha.yah ek chidiya ka naam aap ne bataya aur is se judi kahani bhi.

    -Is dant katha ka dardnaak ant dil dukha gaya.

    - 'फूल देई' tyohar ke bare mein jaankari ke liye abhaar.blogging mein kitna kuchh naya jaNne ko milta hai.
    भिटौली'bhi pahli baar hi sun rahi hun.
    janakri ke liye dhnywaad.

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  5. बहुत सुन्दर लेख है। घुघुति की कहानी मैंने भी अपने ब्लॉग पर

    >यहाँ
    दी है। समय मिले तो पढ़ियेगा।
    घुघूती बासूती

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  6. aadarneey Sreetha ji ki raae se bilkul sehmat hooN...
    ye hamare samajik sarokaar hi haiN jo hm sabhi ko ek sanskriti meiN baandhe rakhne ka daayitv nibha rahe haiN.....
    ---MUFLIS---

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  7. इस खूबसूरत लोक कथा के लिए धन्यवाद...अच्छा लिखा है आपने.

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  8. bahut prasangik dhang se manytaaon aur paramparaaon ko abhivyakti di hai.....bahut badhiyaa laga...

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  9. मुझे ज्ञात हुआ है कि मेरी इस पोस्ट का उल्लेख उत्तर प्रदेश से प्रकाशित होने वाले दैनिक अमर उजाला के १७-३-२००९ के अंक में 'ब्लॉग कोना' के अंतर्गत हुआ है.

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  10. बहुत सुन्दर लेख है हेम जी

    भै भूखो मैं सीती....भाई भूखा चला गया और मैं सोती रही..

    कितना मार्मिक
    बहुत धन्यवाद हेम जी..पहाड़ों की यादें तजा हो गई.. !!!

    सादर

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  11. apki yah post padh ke is prtha ke baare mai kafi kuchh nayi baat pata chal gayi...

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  12. बहुत बढिया प्रयास
    आपके इस प्रयास से हम अपनी लॊकसंस्कृति से परिचित हॊ सके
    बहुत बहुत धन्यवाद

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  13. बहुत सुन्दर लेख है.....
    धन्यवाद...अच्छा लिखा है आपने....

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  14. भिटौली' prv ke bare mey pehle nahi ptaa thaa, aaj hi jaana or lok katha pdh kr bhi accha lga....

    regards

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  15. भै भुखो मैं सिती, भै भुखो मैं सिती .......
    आदरणीय हेम जी ,
    बहुत बढ़िया,ज्ञानवर्धक..... और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया लेख ....आज हमें ऐसे संस्कृति ,परम्पराओं को बताने वाले लेखों को पुस्तक के स्वरूप में सामने lane की कोशिश करनी चाहिए ..ताकि उसका लाभ हमारी आने वाली पीढी को मिल सके.शुभकामनायें .
    हेमंत कुमार

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  16. घुघूती शब्द सिर्फ सबकी प्रिय ब्लोग्गर घुघूती बासूती जी के ब्लॉग पर ही पढ़ा था...आज असली जानकारी प्राप्त हुई...बहुत रोचक लोक कथा सुनाई आपने...
    नीरज

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  17. घुघूती के जन्‍म की कहानी जानकर प्रसन्‍नता हुई।

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  18. जिस जगह का आपना बताया वहाँ ऐसा अभी भी होता होगा शायद ...पढ़कर अच्छा लगा ....

    वैसे मैं चाहता हूँ आप मेरा लिखा हुआ ये पढ़े ...
    एक बेटे की अपने बाप को अनकही बातें आशा करता हूँ की ये आपको जरूर पसंद आएगा

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  19. pandey ji aapke blog par aa kar man bhartiyata ki khushboo se sarabor ho jata hai.
    achhi lagi bhitauli-ghooghooti ki kahani.

    khali panne

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  20. भाई-बहन के प्यार को दर्शाती भावुक कहानी और नई जानकारी दी आपने.

    "क्रांतिकारियों के प्रति गांधीजी के विचार" @
    (gandhivichar.blogspot.com)

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  21. कूर्मांचल में चैत्र का महीना विवाहिता और कुंवारी कन्याओं के लिए विशेष महत्त्व का है. चैत्र माह की संक्रांति को 'फूल देई' का त्यौहार मनाया जाता है. (कूर्मांचल में सौर माह प्रचलित है , जो हर माह की संक्रांति से प्रारंभ होता है.)इस दिन कन्याएं फूल,चावल और गुड़ ले कर मोहल्ले या गाँव के प्रत्येक घर जा कर उनकी देहरी( प्रवेश द्वार) पूजती हैं. और बदले में पैसे और उपहार प्राप्त करती हैं.कन्याओं द्वारा देहरी पूजा जाना शुभ माना जाता है. अनेक लोग अपनी विवाहिता बेटियों से सदैव मायके से विदा होते समय देहरी पुजवाते हैं.
    हेम जी, एक नयी जानकरी मिली आप्के इस लेख से....!!

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  22. बहुत ही सुन्दर,ज्ञानवर्धक और पूर्णत: रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया लोकसंस्कृ्ति से परिचय कराता हुआ लेख.......

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  23. ज्ञाबवृध्दि का शुक्रिया!

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  24. paal post likh rakhi... itu sundar post laagi ki apun pahad ki yaad aa gai....

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  25. कूर्मांचल में सौर माह प्रचलित है , जो हर माह की संक्रांति से प्रारंभ होता है.

    some questions araised in mind
    1 where is this kurmanchal?
    2 can you define the bird ghughuti?
    my email address is rajesh_ghotikar@hotmail.com
    please send me a separate reply if you have the photo of the bird than lease send it to me
    thanks for a beutiful story

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  26. इस खूबसूरत लोक कथा के लिए धन्यवाद...
    आपके इस प्रयास से हम अपनी लॊकसंस्कृति से परिचित हॊ सके.
    एक बार पुनः बहुत बहुत धन्यवाद.

    चन्द्र मोहन गुप्त

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  27. आदरणीय पांडेय जी ,
    वैसे तो ब्लॉग के माध्यम से मेरा आपसे संपर्क हुआ ही था ..पर अपने मित्र राकेश जोशी से आपका परिचय जानकर और प्रसन्नता हुयी .आज ही राकेश जी से आपकी चर्चा हुयी .मैं तो राकेश जोशी जी के साथ शैक्षिक दूरदर्शन ,लखनऊ में पिछले २३ सालों से कम कर रहा हूँ .
    हम लोग बहुत अच्छे मित्र हैं .शुभकामनायें .
    हेमंत कुमार
    mera email blog par diya hai.
    hemant

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  28. is tarah ka sanyojan kam hi dekhane ko milta hai. Apne lok ki ek parmpara or tyohar ke bare me bataya bahut hi sundar laga..
    Apka pyayas sarahniya hai.
    Shubhkamnaye..

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  29. सटीक प्रस्तुति के लिये बधाई स्वीकारें

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  30. बड़ी खूबसूरत और रोचक लोक कथा आपने लिखी है । खासकर उत्तरांचल की लोक कथा और लोक परंपराए देश भर में मशहूर है । आपने जो पोस्ट लिखी है वह काफी रोचक लगा शुक्रिया

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  31. हेम जी

    आशिर्वाद स्वरुप आपके पदचिन्ह मेरे ब्लॉग पर देखकर धन्य हुई
    Warm Regards
    Sehar

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  32. Hem ji kshama prarthi hoon.
    kintu kuchh dinon se awsar hi nahi milla. ab jab bhi aap aayenge nayaa post payenge.
    dhanywaad.

    khali panne

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  33. जीवन के गूढ़ रहस्य लोक कथाएँ , लोक मान्यताएँ और परंपराएँ में छिपी हुई है. बेहद रोचक रचना के लियेया धन्यवाद

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  34. यह लोक कथाएं मर्मस्पर्शी हों वहां तक तो ठीक है मगर यह इतनी मार्मिक क्यों होती हैं?

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  35. Hamari sanskrit ke ek pahlu se parichay karane ke liye dhanywaad.

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  36. Hem ji Maa se suni kahani ko me bhool hi chuki thi.aaj padkar dil me KASAK si uti.saadhuvaad

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