गुरुवार, 2 अप्रैल 2009

आपको मालूम नहीं ? आपके ब्लॉग की चर्चा समाचार पत्र में हुई है.

१७ मार्च की सुबह मेरे पास हल्द्वानी ( उत्तराखंड) से फ़ोन आया आपकी पोस्ट
भिटौली .
आज के अमर उजाला में प्रकाशित हुई है. फिर दिन में देहरादून से भी इसी आशय का फ़ोन आया. मेरी बेटी ने, निकट भविष्य में मुरादाबाद से लौटने वाले एक परिचित को, उस पोस्ट की कटिंग लाने हेतु फ़ोन किया. कुछ ही दिनों में वह कटिंग मेरे पास आ गयी.
वह 'ब्लॉग कोना' स्तम्भ की कटिंग थी. उस स्तम्भ में दो अलग अलग ब्लोगों से एक एक पोस्ट ली गयी थी. एक पोस्ट साइंस ब्लॉग से 'तकनीक ने बदली महिलाओं की जिन्दगी' थी. दूसरी पोस्ट
मेरी थी.


इससे पहले मैंने विनीता यशस्वी जी की एक
पोस्ट पढी थी,जिसमें उन्होंने बताया था की दिल्ली से प्रकाशित होने वाले हिन्दुस्तान में उनके ब्लॉग की चर्चा हुई है, जिसकी जानकारी उन्हें एक फोन से मिली. संगीता पुरी जी को भी उनकी
पोस्ट . के भोपाल से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र में प्रकाशन की जानकारी किसी के फ़ोन से मिली.

इस प्रकार अनेक ब्लोगरों को उनके ब्लॉग या पोस्ट की समाचार पत्रों में हुई चर्चा का पता उनके मित्रों द्वारा लगता है. यह भी सम्भव है कि किसी ब्लॉग की चर्चा किसी पत्र में हो और उस ब्लोगर को इसका भान भी न हो.

एक ध्यान देने योग्य तथ्य यह भी है कि जहां एक ओर कुछ साहित्यकार और पत्रकार ब्लॉग विधा की आलोचना करते हैं वहीं समाचार पत्र और पत्रिकाएँ इनका नोटिस भी ले रही हैं. एक पत्रिका के सम्पादक ने कहा कि ब्लॉग लेखन का एक फायदा जरूर है कि अब लेखक अपनी कचड़ा रचनाएँ हमारे पास भेज कर हमारा समय बर्बाद न करते हुए स्वयं अपने ब्लॉग पर डाल लेते हैं. वहीं किसी ने ब्लॉग लेखन को
सम्पादक के नाम पत्र बताया है.
बहरहाल ब्लॉग लेखक को तन्मयता से अपना काम करते रहना चाहिए.यदि उसके लेखन में कुछ भी सार्थक होगा तो स्वतः ही सामने आयेगा.

30 टिप्‍पणियां:

  1. आप को बधाई।
    अच्छी पोस्ट लिखी है।

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  2. बहरहाल ब्लॉग लेखक को तन्मयता से अपना काम करते रहना चाहिए.यदि उसके लेखन में कुछ भी सार्थक होगा तो स्वतः ही सामने आयेगा. ......haan antatah yahi theek bhi hai.....!!

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  3. बहुत बहुत बधाई ... बहुत सुंदर पोस्‍ट लिखा आपने।

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  4. बधाई आप को.
    अगर संपादक 'ब्लॉगर 'के लिखे पर ध्यान देते हैं तो यह एक अच्छा संकेत है .
    लेखक /रचना कार को अपने हाथ रोक कर नहीं बैठना चाहिये.
    अच्छा या बुरा लेखन कौन निर्णय लेता है?वह भी मनुष्य हैं..तो यह subjective है.लिखते रहीये.

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  5. बहुत बहुत बधाई आप को.लेकिन इन समाचार पत्र वालो को कम से कम एक बार ब्लांग मालिक को बता देना चहिये, वरना इन के नखरे कितने होते है यह किसी लेखक से पुछो, ओर अगर हमारा कचरा है ?तो यह कचरे मै मुंह क्यो मारते है?
    आप का धन्यवाद

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  6. ब्लॉग अभिव्यक्ति का एक नया माध्यम बन चला है और यहाँ भी वही अच्छाईयां -बुराइयाँ हैं !बधाई !

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  7. मैंने भी पडी थी ..भिटौली वाली पोस्ट ...बहुत अच्छी थी ....एक बार मेरे भी ब्लॉग की चर्चा हुई थी हिन्दुस्तान में ...मुझे तीन दिन बाद मेरे ऑरकुट के एक मित्र ने बताया ...फिर मैंने अविनाश वाचस्पति जी से कहा ...तो उन्होंने स्कैन करके वो समाचार भेज था मुझे

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  8. बहुत बधाई हो जी। आगे कई मुकाम हैं आप के ब्लॉग के लिये।

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  9. kachre ko dekhne ke liye invite kisne kiya hai inhe, balki blog se inhen bina kuchh diye liye ucchh-stariya saamgri mil jaati hai, jaari rakhen.

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  10. दैनिक हरिभूमि में
    रोजाना चार ब्‍लॉग पोस्‍टें

    की जाती हैं प्रकाशित

    यह समाचार पत्र

    इंटरनेट पर भी है उपलब्‍ध

    पेज चार पर आप

    रोजाना देख सकते हैं

    आपकी न हो तो भी

    नहीं है कोई बात

    पर आपको मालूम

    तो चलेगा
    और आप उन्‍हें
    बतला भी सकेंगे

    लिंक है http://www.haribhoomi.com/

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  11. Bloger isi liye use likhta hai ki adhik se adhi log uska likha padhen...samachaar patr padhne wale chahe tippani nahin de paate lekin aapko padhte to hain...aur ye ek raasta hai aapko adhik logon dwara jaanne ka...ismen koi buraii nahin hai...
    neeraj

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  12. ठीक कहा आपने, सच्चा और अच्छा तो अंततः नोटिस में आता ही है.

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  13. Hi, warm greeting from bike lover!
    You can download stunning bicycle wallpaper in our website for free.

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  14. badhaai aapko
    vaise bloggers ko ab patrakaar kaa darjaa dee ki maang uthane lagi hai .

    kuchh dio pahle blog ko yahan dainik bhaskar ne pramukhtaa di thi aur usme chape samaachaar ki prati meri aur bheji gai thi jo mere liye garv ki baat thi aap ko ek baar fir mubarak aur sath hi me vinita ji ko bhi

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  15. बहरहाल ब्लॉग लेखक को तन्मयता से अपना काम करते रहना चाहिए.यदि उसके लेखन में कुछ भी सार्थक होगा तो स्वतः ही सामने आयेगा.

    theek kunocha dajyu....

    ...aur usi ley !!
    kunau ke dekcha? Muanu dekho??
    bhagya main hol to afi ap chapol....

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  16. raj bhaitya jil le sahi kaou:
    ... ओर अगर हमारा कचरा है ?तो यह कचरे मै मुंह क्यो मारते है?

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  17. ब्लाग बातचीत करने का एक जरिया जरूर बन गया है । उसमें भी अधिक अगर अखवार में इसका जिक्र हो तो होसले कुछ जरूर बन जाते है आपको शामिल किया गया इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवादो

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  18. वाहवा... बेहतरीन जानकारी के लिये साधुवाद..

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  19. हेम जी
    बहुत बधाई !!
    पोस्ट थी भी तो रोचक

    सादर !!!

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  20. आपने मेरे ब्लॉग को पढ़ने के लिए जद्दोजहद की... शुक्रिया.... आपकी बातें बिल्कुल ठीक हैं। आगे भी मार्गदर्शन की ज़रुरत है.... मैं आपकी मेरे ब्लॉग पर की गयी टिप्पणी की बात कर रहा हूं। धन्यवाद....जितेंद्र भट्ट
    http://apana-pahar.blogspot.com/

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