सोमवार, 28 जून 2010

ब्लॉगजगत में सार्थक भी हो रहा है

ब्लॉगजगत में उठापटक, वाद विवाद, टांग खिंचाई और आरोप प्रत्यारोप तो चलते ही रहते हैं,लेकिन कहीं कुछ बहुत सार्थक भी घटता रहता है, जो भविष्य में ब्लॉग विधा की सार्थकता सिद्ध करने वाला है.ऐसा ही एक प्रयास किया है विवेकानंद पाण्डेय ने अपने ब्लॉग देशभक्त में| इस ब्लॉग के माध्यम से वे संस्कृत भाषा का प्रशिक्षण देने का प्रयास कर रहे हैं.ऐसे प्रयासों की सराहना की जाना चाहिए और प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए.

21 टिप्‍पणियां:

  1. निश्चित ही प्रयासों की सराहना की जाना चाहिए और प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए.

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  2. बिलकुल सच. ब्लॉग की किसी भी धींगामुश्ती से अलग ऐसे साधक चुपचाप अपने काम में लगे हुए हैं. उनका प्रोत्साहन जायज़ है.

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  3. निसंदेह सराहनीय प्रयास है

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  4. बिलकुल सच सराहनीय प्रयास है

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  5. ... संस्कृत भाषा ... पर सीखने वालों की संख्या नगण्य ही रहने की संभावना है!!!

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  6. ऐसे लोगों को प्रशंशा मिलती रहनी चाहिए !!

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  7. सही कह रहे हैं आप .. हिंदी ब्‍लॉग जगत में बहुत सकारात्‍मक कार्य हो रहे हैं !!

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  8. bahut hi saraahaneey prayaas. protsaahan milna chaahiye.hindi blogging me bahut hi saakaaraatmak kaarya ho rahe hain.

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  9. निसंदेह सराहनीय प्रयास

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  10. ब्लाग जगत में कुछ नहीं बहुत कुछ सार्थक हो रहा है। संस्कृत का अब बोलचाल की भाषा बने रहना तो संभव नहीं लगता। लेकिन इस भाषा में विश्व का अनुपम साहित्य और ज्ञान भरा पड़ा है। उसे जीवित रखने और मूल ही पढ़ने के लिए यह आवश्यक है कि लोग इस भाषा को कम से कम पढ़ना और समझना अवश्य सीखें। किसी भी रचना के मूल को पढ़ सकने का आनंद कुछ और ही है।

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  11. सराहनीय प्रयास वह भी है और सराहनीय प्रयास यह आपका भी है, दोनों को बधाई!

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  12. पाण्‍डेय साधुवाद के पाञ हैं।

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  13. एकदम सही कहा आपने...मैं भी संस्कृत सीखने का प्रयास करता हूँ.

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  14. जी देखती हूँ ....कभी थोड़ी बहुत सीखी थी .....!!

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  15. आपके अंदर आध्यात्मिक विचारधारा का प्रवाह है यदि आप मानवता व मानव धर्म आधारित आध्यात्मिक लेख अथवा विचार प्रेषित करें तो अवश्य ही आचार्य जी ब्लाग पर प्रकाशित किये जायेंगे, आपके विचार अधिक से अधिक लोग पढें व मनन करें यही उद्देश्य है, धन्यवाद।
    जय गुरुदेव

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  16. निश्चित ही प्रयासों की सराहना की जाना चाहिए और प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए.

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  17. इस सराहनीय प्रयास का स्वागत होना चाहिए ... ...

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